Close Menu
https://hillwani.in/https://hillwani.in/
    Stay In Touch
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • WhatsApp
    Facebook X (Twitter) WhatsApp YouTube
    ब्रेकिंग न्यूज़ -
    • देहरादून: बंगाल जीत के बाद भाजपा में जश्न, सीएम धामी ने 2027 को लेकर जताया भरोसा
    • देहरादून: टिकट दिलाने के नाम पर 25 लाख की ठगी, खुद को राहुल गांधी का PA बताकर बनाया शिकार
    • देहरादून: STF की बड़ी कार्रवाई, 1.5 करोड़ का हाथी दांत बरामद, 2 तस्कर गिरफ्तार
    • परिवहन मंत्री का एक्शन, UTC की कार्यप्रणाली का लिया जायजा
    • केदारनाथ यात्रा तैयारियों पर जोर, सुरक्षा और स्वच्छता पर फोकस
    • उत्तराखण्ड बनेगा भारतीय ज्ञान-विज्ञान और संस्कृति का वैश्विक केंद्र
    • बिना तैयारी बैठक में पहुंचे अधिकारियों पर सीएम धामी सख्त, जताई कड़ी नाराजगी
    • ऋषिकेश में बिजली लाइनें होंगी भूमिगत, केंद्र ने दिए ₹489 करोड़
    • नैनीताल: 100 मीटर गहरी खाई में गिरी कार, एक युवक की मौत, दो घायल
    • देहरादून: चुनाव नतीजों पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया, उत्तराखंड में बदलाव का दावा
    Wednesday, May 6
    Facebook X (Twitter) WhatsApp YouTube
    https://hillwani.in/https://hillwani.in/
    • होम
    • उत्तराखण्ड
      • अल्मोड़ा
      • उत्तरकाशी
      • उधम सिंह नगर
      • चमोली
      • चम्पावत
      • टिहरी गढ़वाल
      • देहरादून
      • नैनीताल
      • पिथोरागढ़
      • पौड़ी-गढ़वाल
      • बागेश्वर
      • रुद्रप्रयाग
      • हरिद्वार
    • देहरादून
    • राज्य समाचार
    • देश
    • विदेश
    • शिक्षा
    • स्वास्थ्य
    • मनोरंजन
    • व्यापार
    • क्राइम
    Facebook X (Twitter) WhatsApp YouTube
    https://hillwani.in/https://hillwani.in/
    Home»राज्य समाचार»उत्तराखण्ड»जोत सिंह बिष्ट का दांव, अपनी गणना अपने गांव

    जोत सिंह बिष्ट का दांव, अपनी गणना अपने गांव

    hillwaniBy hillwani उत्तराखण्ड
    Share now Facebook Twitter WhatsApp Telegram

    पहाड़ के सरोकारों के प्रति बेहद संवेदनशील भाजपा नेता जोत सिंह बिष्ट ने अपनी गणना अपने गांव अभियान शुरू कर प्रवास में रह रहे पहाड़ियों से जड़ों से जुड़ने का आह्वान किया है। इसके लिए वे निरन्तर लोगों से संवाद कर रहे हैं और लोग उनकी बात सुन भी रहे हैं। इधर भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूचियों का गहन पुनरीक्षण करने का अभियान शुरू किया है तो ऐसे में जोत सिंह बिष्ट के अभियान की प्रासंगिकता और ज्यादा बढ़ गई है।

    पहाड़ से पानी की तरह जवानी भी प्रथम विश्व युद्ध के बाद से मैदान की ओर बहती रही है और उत्तराखंड पृथक राज्य बनने के बाद उसकी रफ्तार भी तेज हुई है। जिन गांवों में पहले सड़क नहीं थी, वहां लोग किसी तरह जद्दोजहद करते हुए टीके हुए थे लेकिन प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से गांव जुड़े तो वे सड़कें लोगों को भी अपने साथ ले आई। नतीजा यह हुआ कि पहले परिसीमन जो वर्ष 2001 की जनगणना के आधार पर हुआ था, उसमें पहाड़ की आधा दर्जन विधानसभा सीटें घट गई थी। कायदे से उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड इसी बात पर अलग हुआ था कि यहां की भौगोलिक परिस्थितियां अत्यंत जटिल हैं, लिहाजा मैदान के हिसाब से यहां के लोगों की आकांक्षाओं की पूर्ति नहीं हो सकती। जब उस आधार पर राज्य का पुनर्गठन हुआ तो जाहिर है पैमाना पूर्वोत्तर राज्यों की तरह भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर विधानसभा सीटों का निर्धारण होना चाहिए था किन्तु इस बात का न परिसीमन आयोग ने ध्यान रखा और न लोगों ने ही।

    अब वर्ष 2027 में जनगणना का काम पूरा होगा तो उसके बाद नए सिरे से परिसीमन भी होगा। उस समय अगर फिर आबादी के हिसाब से पहाड़ की सीटें घट गई तो पर्वतीय राज्य की अवधारणा तो खत्म ही हो जाएगी। जोत सिंह बिष्ट जी की यही चिंता भी है और इसी कारण वे घर घर दरवाजा खटखटा रहे हैं और पहाड़ियों को धै लगा रहे हैं कि बेशक मैदान में रहो लेकिन अपना वोट अपने गांव में दर्ज कराओ।

    जोत सिंह बिष्ट हवा में तीर नहीं चलाते बल्कि आंकड़ों के साथ बात करते हैं। वे बताते हैं कि 1971 की जनगणना के आधार पर उत्तराखंड की 70 विधानसभा सीटों में से नौ पर्वतीय जिलों को 40 सीटें और मैदानी क्षेत्र के लिए 30 सीटें निर्धारित हुई थी लेकिन 2001 की जनगणना के आधार पर हुए परिसीमन वर्ष 2006 में हुए नए परिसीमन में पर्वतीय जिलों में विधानसभा की सीटें 40 से घट कर 34 हो गई जबकि मैदानी जिलों की सीटें बढ़ कर 36 हो गई। अब अगर महज जनसंख्या के आधार पर, जैसे कि वर्ष 2027 में जनगणना पूरी होने की संभावना है और उसके बाद परिसीमन का काम होगा तो पहाड़ से 34 के बजाय 25 विधायक ही चुने जाएंगे जबकि मैदान के विधायकों की संख्या बढ़ कर 45 हो जाएगी। उस स्थिति में पर्वतीय राज्य का औचित्य ही खत्म हो जाएगा। पहाड़ का प्रतिनिधित्व घटने का सीधा अर्थ है देश की दूसरी रक्षा पंक्ति का कमजोर हो जाना। चूंकि हम दो देशों की सीमा से सटे होने के साथ सीमा प्रहरी भी हैं, ऐसे में सीमाओं से जनप्रतिनिधित्व कम होने के खतरे को आसानी से समझा जा सकता है।

    इस लिहाज से जोत सिंह बिष्ट जी की चिंता को समझा जा सकता है और यह उनकी अकेली समस्या भी नहीं है बल्कि समूचे पर्वतीय क्षेत्र के जिम्मेदार और संजीदा लोगों की सांझी समस्या है। यह अलग बात है कि खास राजनीतिक फ्रेम में बंधे लोग इस दिशा में आगे नहीं आए। इस हिसाब से जोत सिंह बिष्ट ने राजनीतिक फ्रेम की चिंता किए बगैर साहसिक अभियान शुरू किया है। लिहाजा मैदान में रह रहे लोगों को उनके आह्वान को तवज्जो देनी चाहिए कि बेशक किसी भी कारण से वे प्रवास में रह रहे हों किंतु अपना वोट गांव में ही दर्ज करवाना चाहिए। इससे पहाड़ के अस्तित्व की भी रक्षा होगी और प्रवास में रह रहे लोग अपनी जड़ों से भी जुड़े रहेंगे। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के बहाने ही लोग मातृभूमि से भेंट कर आयेंगे। यहां एक बात और कहने की है कि कुछ वर्ष पूर्व इगाश बग्वाल गांव में मनाने का आह्वान हुआ था और लोगों ने उस अपील पर अमल भी किया किंतु जब दिल्ली में इगाश मनाई गई तो लोगों को अफसोस भी हुआ। इस दृष्टि से जोत सिंह बिष्ट की अपील निरर्थक नहीं जाएगी। उनका उद्देश्य पवित्र है और ध्येय पहाड़ की पीड़ा से मुक्ति तो उनके अभियान का स्वागत ही नहीं किया जाना चाहिए बल्कि खुले मन से समर्थन भी किया जाना चाहिए। जोत सिंह बिष्ट के अपनी गणना, अपने गांव अभियान में डॉ आर पी रतूड़ी, मथुरा दत्त जोशी, वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत, शीशपाल गुसाईं, पुष्कर सिंह नेगी और तमाम लोग जुड़े हुए हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि पर्वतीय अस्मिता, संस्कृति, भूगोल और सीमाओं की रक्षा की खातिर लोग उन्हें मायूस नहीं करेंगे। वैसे भी जोत सिंह बिष्ट यह प्रयास अपने किसी निहित स्वार्थ के लिए नहीं बल्कि पहाड़वासियों के दूरगामी वृहत्तर हित के लिए कर रहे हैं। ऐसे में तमाम प्रवासियों का यह नैतिक दायित्व भी बन जाता है कि आसन्न एस आई आर के मद्देनजर लोग अपना नाम अपने गांव की मतदाता सूची में दर्ज कराएं।

    उन्होंने जोर देकर कहा है कि “उत्तराखंड तभी सच्चे अर्थों में मजबूत और समृद्ध बनेगा, जब उसका पहाड़ मजबूत होगा। पहाड़ की समस्याएं, पहाड़ की आकांक्षाएं और पहाड़ की आवाज विधानसभा में पूरी ताकत और गरिमा के साथ गूंजेगी। यदि पहाड़ कमजोर रहा, तो पूरा राज्य कमजोर रहेगा। यह लड़ाई पहाड़ के स्वाभिमान, उसके अस्तित्व और उसके भविष्य की लड़ाई है। हम सभी को एकजुट होकर इस अधिकार को हासिल करना होगा, क्योंकि पहाड़ उत्तराखंड की आत्मा है और उसकी अनदेखी राज्य के लिए घातक साबित होगी।”

    जोत सिंह बिष्ट का यह अभियान पहाड़ी क्षेत्रों में लंबे समय से चली आ रही असंतुलन की भावना को मुखर करता है और राज्य की राजनीति में एक नए आंदोलन की शुरुआत का संकेत देता है।

    his calculations in his village Jot Singh Bisht's bet

    Related Posts

    देहरादून: बंगाल जीत के बाद भाजपा में जश्न, सीएम धामी ने 2027 को लेकर जताया भरोसा

    उत्तराखण्ड राज्य समाचार By hillwani

    देहरादून: टिकट दिलाने के नाम पर 25 लाख की ठगी, खुद को राहुल गांधी का PA बताकर बनाया शिकार

    उत्तराखण्ड राज्य समाचार By hillwani

    देहरादून: STF की बड़ी कार्रवाई, 1.5 करोड़ का हाथी दांत बरामद, 2 तस्कर गिरफ्तार

    उत्तराखण्ड क्राइम By hillwani
    Leave A Reply Cancel Reply

    Stay In Touch
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • WhatsApp
    Demo
    Top Posts

    अतिरिक्त कार्यों का कोई एक्सक्यूज नहीं, अपनी कोर्ट में समय देकर भू कानून सम्बन्धी वादों का करें निपटाराः डीएम 

    January 1, 2025

    श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में डाॅक्टरों व स्टाफ ने किया नववर्ष का जोरदार स्वागत

    January 1, 2025

    सरनौल सुतुड़ी-सरूताल ट्रैक के लिए 74.20 लाख स्वीकृत, 40 लाख रिलीज

    January 2, 2025

    उत्तराखंड के फेमस इंटरनेशनल फुटबाल कोच विरेन्द्र सिंह रावत से बने डॉ विरेन्द्र सिंह रावत – वर्ष 2024 उपलब्धियों से भरा रहा

    January 2, 2025

    देहरादून नगर निगम के वार्ड संख्या 61 से कांग्रेस टिकट के इच्छुक परितोष सिंह ने पार्टी द्वारा अधिकृत प्रत्याशी के समर्थन में नाम वापस लिया

    January 2, 2025

    भाजपा का प्रचार अभियान कल से, बूथ स्तर पर होंगे कार्यकर्ता सम्मेलन

    January 2, 2025
    Follow Us
    Weather
    Live Cricket
    Live Cricket Scores
    About Hillwani

    Hillwani is a leading Hindi online news analysis portal. Launched in 2021, and we focuses on delivering around the clock Different variety news analysis, Agriculture, Education, Business, Entertainment, Art-Literature-Culture and Media etc.
    We're accepting new partnerships right now.

    Email Us: info@hillwani.in

    Facebook X (Twitter) YouTube WhatsApp
    Our Picks

    देहरादून: बंगाल जीत के बाद भाजपा में जश्न, सीएम धामी ने 2027 को लेकर जताया भरोसा

    May 5, 2026

    देहरादून: टिकट दिलाने के नाम पर 25 लाख की ठगी, खुद को राहुल गांधी का PA बताकर बनाया शिकार

    May 5, 2026

    देहरादून: STF की बड़ी कार्रवाई, 1.5 करोड़ का हाथी दांत बरामद, 2 तस्कर गिरफ्तार

    May 5, 2026
    Most Popular

    अतिरिक्त कार्यों का कोई एक्सक्यूज नहीं, अपनी कोर्ट में समय देकर भू कानून सम्बन्धी वादों का करें निपटाराः डीएम 

    January 1, 2025

    श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में डाॅक्टरों व स्टाफ ने किया नववर्ष का जोरदार स्वागत

    January 1, 2025

    सरनौल सुतुड़ी-सरूताल ट्रैक के लिए 74.20 लाख स्वीकृत, 40 लाख रिलीज

    January 2, 2025
    Facebook X (Twitter) YouTube WhatsApp
    • होम
    • About Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer
    © Copyright 2025 Hillwani All Rights Reserved.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.