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    Home»राज्य समाचार»उत्तराखण्ड»UCC in Uttarakhand: धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने आज रच दिया इतिहास, यूसीसी लागू, पोर्टल व नियमावली का लोकार्पण

    UCC in Uttarakhand: धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने आज रच दिया इतिहास, यूसीसी लागू, पोर्टल व नियमावली का लोकार्पण

    hillwaniBy hillwani उत्तराखण्ड
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    Unifrom Civil Code in Uttarakhand:उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अगुआई में आज राज्य ने इतिहास रच दिया है। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू हो चुका है। यह लम्हा पूरे ढाई साल की तैयारियों के बाद आज राज्य को नसीब हुआ है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज यूसीसी पोर्टल और नियमावली का लोकार्पण किया और इसी के साथ उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है जहां यूनिफार्म सिविल कोड लागू हो गया है।

     

    इस दौरान सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड से निकली यूसीसी की गंगा पूरे देश को लाभ पहुंचाएगी। सीएम ने कहा कि अब बाल विवाह, बहु विवाह, हलाला जैसी कुप्रथाओं पर रोक लगेगी। सीएम ने कहा कि अब श्रद्धा वाल्कर जैसा जघन्य अपराध भी नहीं होगा। सीएम धामी ने कहा कि यूसीसी लागू होते ही आधी आबादी को पूरे अधिकार आज मिल गए हैं।

     

    यूसीसी नियमावली हाईलाइट

    दायरा – अनुसूचित जनजातियों को छोड़कर, सम्पूर्ण उत्तराखंड राज्य, साथ ही राज्य से बाहर रहने वाले उत्तराखंड के निवासियों पर लागू।

    प्राधिकार – यूसीसी लागू करने के लिए ग्रामीण क्षेत्र में एसडीएम रजिस्ट्रार और ग्राम पंचायत विकास अधिकारी सब रजिस्ट्रार होंगे। जबकि नगर पंचायत – नगर पालिकाओं में संबंधित एसडीएम रजिस्ट्रार और कार्यकारी अधिकारी सब रजिस्ट्रार होंगे।
    इसी तरह नगर निगम क्षेत्र में नगर आयुक्त रजिस्ट्रार और कर निरीक्षक सब रजिस्ट्रार होंगे। छावनी क्षेत्र में संबंधित CEO रजिस्ट्रार और रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर या सीईओ द्वारा अधिकृत अधिकारी सब रजिस्ट्रार होंगे। इन सबके उपर रजिस्ट्रार जनरल होंगे, जो सचिव स्तर के अधिकारी एवं इंस्पेक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन होंगे।

    रजिस्ट्रार जनरल के कर्तव्य
    – यदि रजिस्ट्रार तय समय में कार्रवाई नहीं कर पाते हैं तो मामला ऑटो फारवर्ड से रजिस्ट्रार जनरल के पास जाएगा। इसी तरह रजिस्ट्रार या सब रजिस्ट्रार के आदेश के खिलाफ रजिस्ट्रार जनरल के पास अपील की जा सकेगी, जो 60 दिन के भीतर अपील का निपटारा कर आदेश जारी करेंगे।

    रजिस्ट्रार के कर्तव्य
    सब रजिस्ट्रार के आदेश के खिलाफ अपील पर 60 दिन में फैसला करना। लिव इन नियमों का उल्लंघन या विवाह कानूनों का उल्लंघन करने वालों की सूचना पुलिस को देंगे।

    सब रजिस्ट्रार के कर्तव्य
    सामान्य तौर पर 15 दिन और तत्काल में तीन दिन के भीतर सभी दस्तावेजों और सूचना की जांच, आवेदक से स्पष्टीकरण मांगते हुए निर्णय लेना
    समय पर आवेदन न देने या नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना लगाने के साथ ही पुलिस को सूचना देना, साथ ही विवाह जानकारी सत्यापित नहीं होने पर इसकी सूचना माता- पिता या अभिभावकों को देना।

    विवाह पंजीकरण
    26 मार्च 2010, से संहिता लागू होने की तिथि बीच हुए विवाह का पंजीकरण अगले छह महीने में करवाना होगा

    संहिता लागू होने के बाद होने वाले विवाह का पंजीकरण विवाह तिथि से 60 दिन के भीतर कराना होगा

    आवेदकों के अधिकार
    यदि सब रजिस्ट्रार- रजिस्ट्रार समय पर कार्रवाई नहीं करता है तो ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है।

    सब रजिस्ट्रार के अस्वीकृति आदेश के खिलाफ 30 दिन के भीतर रजिस्ट्रार के पास अपील की जा सकती है।

    रजिस्ट्रार के अस्वीकृति आदेश के खिलाफ 30 दिन के भीतर रजिस्ट्रार जनरल के पास अपील की जा सकती है।

    अपीलें ऑनलाइन पोर्टल या ऐप के माध्यम से दायर हो सकेंगी।

    (लिव इन)
    संहिता लागू होने से पहले से स्थापित लिव इन रिलेशनशिप का, संहिता लागू होने की तिथि से एक महीने के भीतर पंजीकरण कराना होगा। जबकि संहिता लागू होने के बाद स्थापित लिव इन रिलेशनशिप का पंजीकरण, लिवइन रिलेशनशिप में प्रवेश की तिथि से एक महीने के भीतर पंजीकरण कराना होगा।

    लिव इन समाप्ति – एक या दोनों साथी आनलाइन या ऑफलाइन तरीके से लिव इन समाप्त करने कर सकते हैं। यदि एक ही साथी आवेदन करता है तो रजिस्ट्रार दूसरे की पुष्टि के आधार पर ही इसे स्वीकार करेगा।

    यदि लिव इन से महिला गर्भवती हो जाती है तो रजिस्ट्रार को अनिवार्य तौर पर सूचना देनी होगी। बच्चे के जन्म के 30 दिन के भीतर इसे अपडेट करना होगा।

    विवाह विच्छेद –
    तलाक या विवाह शून्यता के लिए आवेदन करते समय, विवाह पंजीकरण, तलाक या विवाह शून्यता की डिक्री का विवरण अदालत केस नंबर, अंतिम आदेश की तिथि, बच्चों का विवरण कोर्ट के अंतिम आदेश की कॉपी।

    वसीयत आधारित उत्तराधिकार
    वसीयत तीन तरह से हो सकेगी। पोर्टल पर फार्म भरके, हस्तलिखित या टाइप्ड वसीयड अपलोड करके या तीन मिनट की विडियो में वसीयत बोलकर अपलोड करने के जरिए।

    —
    यूसीसी की यात्रा
    27 मई 2022 – यूसीसी पर विशेषज्ञ समिति का गठन

    02 फरवरी 2024 – यूसीसी पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत

    08 फरवरी 2024 – राज्य विधानसभा द्वारा अधिनियम अनुमोदित

    08 मार्च 2024 – भारत के राष्ट्रपति द्वारा अधिनियम अनुमोदित

    12 मार्च 2024 – यूसीसी उत्तराखंड अधिनियम 2024 जारी

    18 अक्टूबर 2024 – यूसीसी नियमावली प्रस्तुत

    27 जनवरी 2025 – यूसीसी लागू

    —

    यूसीसी के क्रियान्वयन की कार्ययोजना

    – ऑनलाइन आवेदन के लिए पोर्टल (ucc.uk.gov.in) विकसित

    – कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) Training Partner के रूप में नामित

    – क्रियान्वयन व प्रशिक्षण के लिए ज़िलों में नोडल अधिकारी नामित

    – सहायता और तकनीकी परामर्श के लिए हेल्पडेस्क (1800-180-2525) स्थापित

    – विधिक प्रश्नों के समाधान के लिए जिला स्तरीय अधिकारी नियुक्त

    – नागरिक जागरूकता और अधिकारियों की सुविधा के लिए Short Video एवं Booklets

    UCC in Uttarakhand

    2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने वादा किया था कि बीजेपी दोबारा सरकार में लौटेगी तो सबसे पहले यूसीसी लागू करने को लेकर कैबिनेट में फैसला लिया जाएगा। इसी कड़ी में बीजेपी को दोबारा सत्ता मिलने के बाद मुख्यमंत्री धामी ने कैबिनेट में निर्णय लिया। इसके बाद समान नागरिक संहिता के लिए 27 मई 2022 को विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट दो फरवरी 2024 को सरकार को सौंपी थी।

    इसके बाद आठ मार्च 2024 को विधानसभा में यूसीसी से संबंधित विधेयक पारित किया गया। विधानसभा से पास होने के बाद इस इसे राष्ट्रपति के अनुमोदन के लिए भेजा गया। यहां से 12 मार्च 2024 को इस अधिनियम पर राष्ट्रपति का अनुमोदन मिल गया। इसके बाद यूसीसी के क्रियान्वयन के लिए तकनीक आधारित व्यवस्थाएं लागू की गईं। नागरिकों और अधिकारियों के लिए ऑनलाइन पोर्टल विकसित किए गए। बीती 20 जनवरी को यूसीसी की नियमावली को अंतिम रूप देकर कैबिनेट ने इसे पास कर दिया।

    बीते कई दिनों से इसके पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन को लेकर विभिन्न स्तरों पर मॉक ड्रिल भी चल रही थी। शुक्रवार को हुई मॉक ड्रिल में पहले आई समस्याओं को दूर कर लिया गया। आज दोपहर 12.30 बजे यूसीसी की नियमावली का भी लोकार्पण किया गया।

    इस दौरान मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि समिति ने कई सालों की मेहनत के बाद यूसीसी को तैयार किया है। यह हमारे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। समाज पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। पंजीकरण की प्रक्रिया को भी आसान किया गया है।

    यूसीसी नियमावली समिति के अध्यक्ष और पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने कहा कि पंजीकरण को आसान बनाया गया है। आप एक बार हमारे पोर्टल पर आइए। फिर आप सिस्टम के पास नहीं सिस्टम आपके पास आएगा।

    यूसीसी लागू करने को लेकर हुए ये भगीरथ प्रयास

    -43 हितधारकों के साथ बैठकें की गई
    72 गहन विचार विमर्श बैठकें की गई
    -49 लाख एसएमएस प्राप्त हुए
    29 लाख व्हाट्सएप मैसेज आए
    प्रदेशभर में 2.33 लाख नागरिकों ने सुझाव दिए
    -61 हजार पोर्टलों पर सुझाव प्राप्त हुए
    -36 हजार सुझाव डाक माध्यम से प्राप्त हुए
    1.20 लाख सुझाव दस्ती से आए
    24 हजार ई-मेल से भी सुझाव मिले

    समिति ने इन देशों में लागू यूसीसी का अध्ययन किया

    सऊदी, तुर्कीए, इंडोनेशिया, नेपाल, फ्रांस, अजरबैजान, जर्मनी, जापान और कनाडा।

    यूसीसी की एक्सपर्ट कमेटी ने पहली बैठक 4 जुलाई 2022 को दिल्ली में की थी। समिति ने बैठकों, परामर्शों, क्षेत्र के दौरे और विशेषज्ञों और जनता के साथ बातचीत के बाद मसौदा तैयार किया। इस प्रक्रिया में 13 महीने से अधिक का समय लगा। सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने 4 जुलाई 2022 को हुई पहली बैठक से लेकर नीती माना सहित प्रदेश के विभिन्न सीमांत इलाकों तक जाकर भी रायशुमारी की।

    ढाई लाख लोगों से सीधे मिलकर इस मुद्दे पर उनकी राय जानी

    इसमें महत्वपूर्ण पहलुओं पर जुलाई 2023 में एक मैराथन बैठक में विचार-विमर्श किया गया और इसे अंतिम रूप दिया गया। कमेटी को समान नागरिक संहिता पर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से करीब 20 लाख सुझाव मिले हैं। इनमें से कमेटी ने लगभग ढाई लाख लोगों से सीधे मिलकर इस मुद्दे पर उनकी राय जानी है।

    घोषणा से कानून बनने तक का सफर
    12 फरवरी 2022 को विस चुनाव के दौरान सीएम धामी ने यूसीसी की घोषणा की।
    मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में यूसीसी लाए जाने पर फैसला।
    मई 2022 में सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति बनी।
    समिति ने 20 लाख सुझाव ऑफलाइन और ऑनलाइन प्राप्त किए।
    2.50 लाख लोगों से समिति ने सीधा संवाद किया।
    02 फरवरी 2024 को विशेषज्ञ समिति ने ड्राफ्ट रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी।
    06 फरवरी को विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश हुआ।
    07 फरवरी को विधेयक विधानसभा से पारित हुआ।
    राजभवन ने विधेयक को मंजूरी के लिए राष्ट्रपति को भेजा।
    11 मार्च को राष्ट्रपति ने यूसीसी विधेयक को अपनी मंजूरी दी।
    यूसीसी कानून के नियम बनाने के लिए एक समिति का गठन।
    नियमावली एवं क्रियान्वयन समिति ने हिंदी और अंग्रेजी दोनों संस्करणों में आज 18 अक्तूबर 2024 को राज्य सरकार को नियमावली साैंपी।
    20 जनवरी 2025 को नियमावली को कैबिनेट की मंजूरी मिली।
    यूसीसी लागू होगा तो यह आएंगे बदलाव
    सभी धर्म-समुदायों में विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता और विरासत के लिए एक ही कानून।
    26 मार्च 2010 के बाद से हर दंपती के लिए तलाक व शादी का पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
    ग्राम पंचायत, नगर पंचायत, नगर पालिका, नगर निगम, महानगर पालिका स्तर पर पंजीकरण की सुविधा।
    पंजीकरण न कराने पर अधिकतम 25,000 रुपये का जुर्माना।
    पंजीकरण नहीं कराने वाले सरकारी सुविधाओं के लाभ से भी वंचित रहेंगे।
    विवाह के लिए लड़के की न्यूनतम आयु 21 और लड़की की 18 वर्ष होगी।
    महिलाएं भी पुरुषों के समान कारणों और अधिकारों को तलाक का आधार बना सकती हैं।
    हलाला और इद्दत जैसी प्रथा खत्म होगी। महिला का दोबारा विवाह करने की किसी भी तरह की शर्तों पर रोक होगी।
    कोई बिना सहमति के धर्म परिवर्तन करता है तो दूसरे व्यक्ति को उस व्यक्ति से तलाक लेने व गुजारा भत्ता लेने का अधिकार होगा।
    एक पति और पत्नी के जीवित होने पर दूसरा विवाह करना पूरी तरह से प्रतिबंधित होगा।
    पति-पत्नी के तलाक या घरेलू झगड़े के समय पांच वर्ष तक के बच्चे की कस्टडी उसकी माता के पास रहेगी।
    संपत्ति में बेटा और बेटी को बराबर अधिकार होंगे।
    जायज और नाजायज बच्चों में कोई भेद नहीं होगा।
    नाजायज बच्चों को भी उस दंपती की जैविक संतान माना जाएगा।
    गोद लिए, सरगोसी से असिस्टेड री प्रोडेक्टिव टेक्नोलॉजी से जन्मे बच्चे जैविक संतान होंगे।
    किसी महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे के संपत्ति में अधिकार संरक्षित रहेंगे।
    कोई व्यक्ति किसी भी व्यक्ति को वसीयत से अपनी संपत्ति दे सकता है।
    लिव इन में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए वेब पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य होगा।
    युगल पंजीकरण रसीद से ही किराया पर घर, हॉस्टल या पीजी ले सकेंगे।
    लिव इन में पैदा होने वाले बच्चों को जायज संतान माना जाएगा और जैविक संतान के सभी अधिकार मिलेंगे।
    लिव इन में रहने वालों के लिए संबंध विच्छेद का भी पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
    अनिवार्य पंजीकरण न कराने पर छह माह के कारावास या 25 हजार जुर्माना या दोनों का प्रावधान होंगे।

    UCC in Uttarakhand UNIFORM CIVIL CODE

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