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    Home»राज्य समाचार»उत्तराखण्ड»कैग की रिपोर्ट में नमामि गंगे पर सवाल, 800 करोड़ खर्च के बाद भी गंगा में गिर रही गंदगी

    कैग की रिपोर्ट में नमामि गंगे पर सवाल, 800 करोड़ खर्च के बाद भी गंगा में गिर रही गंदगी

    hillwaniBy hillwani उत्तराखण्ड
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    देहरादून।
    गंगा को निर्मल और अविरल बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही महत्वाकांक्षी नमामि गंगे योजना के तहत उत्तराखंड में हुए कार्यों पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने कई गंभीर खामियां उजागर की हैं।

    वर्ष 2018-19 से 2022-23 की अवधि पर आधारित इस परफॉर्मेंस ऑडिट में सामने आया कि योजना के तहत बनाए गए कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) या तो बेकार पड़े हैं, कई स्थानों पर घरों से सीवर कनेक्शन ही नहीं हैं और कई प्लांट अपनी क्षमता से अधिक सीवेज ले रहे हैं। वहीं कई जगहों पर बिना उपचार के ही गंदा पानी गंगा में छोड़ा जा रहा है।

    यह रिपोर्ट 10 मार्च 2026 को राज्य विधानसभा में पेश की गई। इसमें योजना की रूपरेखा, ढांचा निर्माण, परियोजना क्रियान्वयन, वित्तीय प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई है।


    13 साल बाद भी नहीं बना गंगा बेसिन प्रबंधन प्लान

    रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2011 में राज्य नदी संरक्षण प्राधिकरण ने लक्ष्य तय किया था कि वर्ष 2020 तक गंगा में बिना उपचारित शहरी सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट का प्रवाह पूरी तरह रोक दिया जाएगा।

    हालांकि, 13 वर्ष बीत जाने के बाद भी स्टेट रिवर बेसिन मैनेजमेंट प्लान तैयार नहीं किया गया।

    इसके अलावा गंगा बेसिन के सात जिलों में भी जिला गंगा योजना नहीं बनाई गई। इनमें शामिल हैं

    • उत्तरकाशी

    • टिहरी

    • चमोली

    • रुद्रप्रयाग

    • पौड़ी

    • देहरादून

    • हरिद्वार

    इस कारण सीवरेज प्रबंधन बिखरे हुए तरीके से हुआ और तय लक्ष्य हासिल नहीं हो सका।


    योजना में स्थानीय समुदाय की भागीदारी नहीं

    नमामि गंगे योजना का एक प्रमुख उद्देश्य स्थानीय समुदायों को योजना निर्माण में शामिल करना था।

    लेकिन ऑडिट में पाया गया कि राज्य गंगा समिति, स्टेट मिशन फॉर क्लीन गंगा और क्रियान्वयन एजेंसियों ने स्थानीय लोगों को योजना प्रक्रिया में शामिल ही नहीं किया।

    इसके परिणामस्वरूप कई जगह अनुपयोगी या गलत ढंग से बने सीवरेज ढांचे सामने आए।


    राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से नहीं बनाया कोई STP

    CAG रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि गंगा किनारे बसे शहरों में सीवेज ढांचे के निर्माण पर राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से कोई खर्च नहीं किया।

    किसी भी शहर में राज्य सरकार ने STP या घरेलू सीवर कनेक्शन नहीं बनाए।

    जर्मनी की KfW बैंक से वित्तपोषित परियोजनाएं भी केवल हरिद्वार और ऋषिकेश तक सीमित रहीं।


    21 STP बने, लेकिन घरों से नहीं जुड़े सीवर

    ऑडिट के अनुसार सात गंगा नगरों में बनाए गए 21 STP घरों से जुड़े ही नहीं।

    इनमें शामिल हैं

    • नंदप्रयाग – 2 STP

    • कर्णप्रयाग – 5 STP

    • रुद्रप्रयाग – 6 STP

    • कीर्तिनगर – 2 STP

    • चमोली – 1 STP

    • श्रीनगर-श्रीकोट – 3 STP

    • जोशीमठ – 2 STP

    उदाहरण के तौर पर जोशीमठ में 2010 से 2017 के बीच 42.73 करोड़ रुपये खर्च कर STP बनाए गए, लेकिन किसी भी घर को सीवर नेटवर्क से नहीं जोड़ा गया।


    कई शहरों में बहुत कम घर जुड़े STP से

    ऑडिट में पाया गया कि कई शहरों में STP से जुड़े घरों की संख्या बेहद कम है।

    शहर STP से जुड़े घर
    हरिद्वार 69%
    ऋषिकेश 29%
    श्रीनगर 12%
    उत्तरकाशी 9%
    चमोली 6%

    मुख्य कारणों में पर्याप्त सीवर लाइन का अभाव, कम क्षमता वाले STP और को-ट्रीटमेंट प्लांट का न बनना शामिल हैं।


    हरिद्वार और ऋषिकेश के STP पर क्षमता से अधिक दबाव

    कई STP अपनी निर्धारित क्षमता से अधिक सीवेज प्राप्त कर रहे हैं।

    उदाहरण

    • हरिद्वार का 68 MLD STP

      • क्षमता: 68 MLD

      • प्राप्त सीवेज: 84 MLD तक

    • ऋषिकेश का चोरपानी STP

      • क्षमता: 5 MLD

      • प्राप्त सीवेज: 17 MLD तक


    कई STP लगभग बेकार पड़े

    कुछ STP बहुत कम उपयोग में आ रहे हैं।

    • देवप्रयाग – 1.40 MLD क्षमता लेकिन केवल 70 घर जुड़े

    • जोशीमठ – 1.08 MLD STP, सीवर लाइन बंद होने से लगभग निष्क्रिय


    गौचर में STP ही नहीं बनाया

    गंगा किनारे बसे गौचर नगर में लगभग 3,930 घर हैं, लेकिन वहां कोई STP नहीं बनाया गया।

    बाद में दिसंबर 2023 में स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट का प्रस्ताव दिया गया।


    12 STP से बिना उपचार के गंगा में गिर रहा सीवेज

    ऑडिट में पाया गया कि 12 STP से बिना उपचार का सीवेज गंगा में छोड़ा जा रहा था।

    इनमें शामिल हैं

    • ढालवाला STP (ऋषिकेश)

    • कीर्तिनगर STP

    • रुद्रप्रयाग के 4 STP

    • श्रीकोट STP

    • पोखरी बैंड STP (गोपेश्वर)

    • कर्णप्रयाग के 4 STP


    ऋषिकेश में ठेकेदार ने जानबूझकर छोड़ा गंदा पानी

    ऑडिट में खुलासा हुआ कि ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम और तपोवन STP से संचालन ठेकेदार ने जानबूझकर बिना उपचार का सीवेज गंगा में छोड़ दिया।

    यह जल अधिनियम 1974 का उल्लंघन है।


    सुरक्षा लापरवाही से हादसे

    रिपोर्ट में सुरक्षा लापरवाही से जुड़े हादसे भी सामने आए।

    • रुद्रप्रयाग – भूस्खलन में 75 KLD STP नष्ट, 0.88 करोड़ का नुकसान

    • चमोली – STP में बिजली उपकरण खराब होने से 28 लोग करंट से प्रभावित

      • 16 की मौत

      • 12 घायल


    देवप्रयाग से हरिद्वार तक गंगा जल की गुणवत्ता घटी

    10 वर्षों के डेटा के विश्लेषण में पाया गया कि

    • देवप्रयाग तक पानी A श्रेणी का

    • ऋषिकेश और हरिद्वार में B श्रेणी का

    देवप्रयाग से हरिद्वार के बीच 93 किमी दूरी में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया 32 गुना बढ़ गया।


    ज्यादातर STP मानकों पर खरे नहीं

    2023 में जांच किए गए 44 STP में केवल 3 से 5 STP ही NGT मानकों पर खरे उतरे, जबकि 6 से 12 STP MoEF मानकों पर खरे पाए गए।

    कुछ STP में प्रदूषण स्तर बेहद अधिक पाया गया।

    • BOD: 1237 mg/l

    • TSS: 909 mg/l

    • फीकल कोलीफॉर्म: 24×10¹¹ MPN/100ml


    CAG ने सरकार को दिए 11 प्रमुख सुझाव

    रिपोर्ट में स्थिति सुधारने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

    • सभी STP का सुरक्षा ऑडिट कराया जाए

    • सभी घरों को सीवर नेटवर्क से जोड़ा जाए

    • सेप्टेज निपटान के लिए को-ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाएं

    • STP क्षमता तय करने में वास्तविक डेटा का उपयोग हो

    • स्लज प्रबंधन तकनीक लागू करने से पहले पायलट परीक्षण हो

    • नगर निकाय ठोस कचरा प्रबंधन की अनुमति लें

    • प्रदूषण बोर्ड की प्रयोगशालाओं को NABL मान्यता मिले

    • STP के खराब प्रदर्शन पर जवाबदेही तय की जाए

    CAG report questions Namami Gange says despite spending Rs 800 crore sewage continues to flow into the Ganga.

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